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Showing posts from 2016

ब्रिटिशों ने भारत पर ऐसे अत्याचार किये थे जिनके सामने आज का ISIS और बोको हरम कुछ नहीं है !

ब्रिटिशों ने भारत पर ऐसे अत्याचार किये थे जिनके सामने आज का ISIS और बोको हरम कुछ नहीं है भारत में लोग फिल्मों में जलियांवाला बाग़ हत्याकांड तथा भगत-सुखदेव-राजगुरु की फांसी मात्र देखकर आज भी भडक उठते हैं । लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं होगा उनके ही देश में ऐसे ऐसे कत्लेआम व नरसंहार अंजाम दिए गये हैं । जिनके सामने आज के ISIS, बोको हरम व तालिबान अलकायदा कुछ भी नहीं हैं । ऐसे ही एक क्रूरतम नरसंहार के बारे में हम बता रहे हैं आपको जिससे आप आजतक शायद अनजान हैं, जिसे ब्रिटिश सरकार व उसके तत्कालीन तानाशाह मुखिया विंस्टन चर्चिल ने अंजाम दिया था। यह नरसंहार था इतिहास के क्रूरतम कत्लेआमों में से एक ‘बंगाल का अकाल’ जिसे इतिहास ने मात्र एक अकाल समझकर भुला दिया जो कि सीधा सीधा कत्लेआम था जिसे विंस्टन चर्चिल व ब्रिटिश सरकार ने अंजाम दिया था। हिटलर ने लाखों यहूदियों को मार दिया था उसके लिए यहूदी आजतक रोते रहते हैं व अपने तगड़े सूचना तंत्र तथा मार्केटिंग के बल पर दुनिया की सहानुभूति बटोरते रहते हैं । लेकिन भारतीयों पर हुए अत्याचारों की कहीं कोई चर्चा नही होती । चाहे वो वर्षों इस्लामी आक...

क्या है भगवान श्री कृष्ण की 16 कलाएं ?

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श्रीकृष्ण और १६ कलाएं : क्या होती हैं सोलह कलाएं ?? श्रीकृष्ण को संपूर्ण अवतार माना जाता है । वह सोलह कलाओं के स्वामी थे। सामान्य मनुष्य में पांच कलाएं अभिव्यक्त होती हैं। यही मनुष्य योनि की पहचान भी है। पांच कलाओं से कम होने पर पशु, वनस्पति आदि की योनि बनती है और पांच से आठ कलाओं तक श्रेष्ठ मनुष्य की श्रेणी बनती है। अवतार नौ से लेकर सोलह कलाओं तक से युक्त होते हैं। श्रीराम बारह और भगवान कृष्ण सोलह कलाओं के स्वामी माने गए हैं …. भगवान श्रीकृष्ण के बारे में कहा जाता था कि वह संपूर्णावतार थे और मनुष्य में निहित सभी सोलह कलाओं के स्वामी थे। यहां पर कला शब्द का प्रयोग किसी ‘आर्ट’ के संबंध में नहीं किया गया है बल्कि मनुष्य में निहित संभावनाओं की अभिव्यक्ति के स्तर के बारे में किया गया है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार ईश्वर का पूर्णावतार, ईश्वर के सोलह अंशों (कला) से पूर्ण होता है। सामान्य मनुष्य में पांच अशों (कलाओं) का समावेश होता है। यही मनुष्य योनि की पहचान भी है। पांच कलाओं से कम होने पर पशु, वनस्पति आदि की योनि बनती है और पांच से आठ कलाओं तक श्रेष्ठ मनुष्य की श्रेणी बनती है। अवता...

रामचरित्र मानस की ये बाते, आप ने नही पढ़ी शायद ।।

🏹रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य🏹 1:~मानस में राम शब्द = 1443 बार आया है। 2:~मानस में सीता शब्द = 147 बार आया है। 3:~मानस में जानकी शब्द = 69 बार आया है। 4:~मानस में बैदेही शब्द = 51 बार आया है। 5:~मानस में बड़भागी शब्द = 58 बार आया है। 6:~मानस में कोटि शब्द = 125 बार आया है। 7:~मानस में एक बार शब्द = 18 बार आया है। 8:~मानस में मन्दिर शब्द = 35 बार आया है। 9:~मानस में मरम शब्द = 40 बार आया है। 10:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे। 11:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं। 12:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है। 13:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है। 14:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है। 15:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है। 16:~मानस में छन्द संख्या = 86 है। 17:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का। 18:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र में। 19:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र = 77 वर्ष थी। 20:~पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी। 21:~रामादल व रावण दल का युद्ध = 87 दिन चला। 22:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला। 23:~सेतु निर्माण = 5 दिन में हुआ। 24:~नलनील के पिता = विश्वकर्मा जी है...

याद आएंगी अम्मा, जानिए जयललिता के वे फैसले जिनसे जीता लोगों का दिल

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जयललिता एक  मास लीडर बनीं। उनके समर्थकों का समूह हर दौर में उनके साथ बना रहा। जबकि भारत के राजनीतिक परिदृश्य में ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है। जयललिता की जनप्रियता  राजनीति  में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े कई  मिथक  तोडऩे वाली है। गरीबों को भरपेट सस्ता खाना उपलब्ध  करवाना और शराबबंदी जैसे निर्णयों ने उन्हें लोगों के दिलों में पुख्ता जगह बनाने का मौका दिया। साथ ही महिलाओं की समस्याओं और सुरक्षा को लेकर भी जयललिता ने कई संवेदनशील निर्णय किए।  वर्ष 1992 में उनकी सरकार ने बालिकाओं की रक्षा के लिए 'क्रैडल बेबी स्कीम' शुरू की ताकि अनाथ और बेसहारा बच्चियों को खुशहाल जीवन मिल सके। इस स्कीम को बहुत सराहा गया। उनकी  सरकार ने 1992 में ही राज्य में ऐसे पुलिस थाने भी खोले जहां केवल महिलाएं ही तैनात थीं।  लड़कियों को शादी से पहले सरकार की ओर से दिए जाने वाले चार ग्राम सोने को बढ़ाकर आठ ग्राम करना भी उनकी जनप्रिय स्कीम रही। महिलाओं के लिए जरूरत की चीजें मुफ्त मुहैया करवाने की नीति ने भी उन्हें  लोकप्रिय बनाया। क्योंकि ये...

आखिर क्या है! महादेव भगवान शिव के शिवलिंग का रहस्य ??

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जानिये शिवलिंग (Shivling) का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व:- आज के समय में कुछ अज्ञानी किस्म के प्राणियों ने परम पवित्र शिवलिंग को जननांग समझ कर पता नही क्या-क्या और कपोल कल्पित अवधारणाएं फैला रखी हैं। क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग का मतलब क्या होता है और, शिवलिंग किस चीज का प्रतिनिधित्व करता है ? शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड (क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है) का अक्स/धुरी (axis) ही लिंग है। दरअसल ये गलतफहमी भाषा के रूपांतरण और, मलेच्छों द्वारा हमारे पुरातन धर्म ग्रंथों को नष्ट कर दिए जाने तथा, अंग्रेजों द्वारा इसकी व्याख्या से उत्पन्न हुआ हो सकता है! खैर जैसा कि हम सभी जानते है कि एक ही शब्द के विभिन्न भाषाओँ में अलग-अलग अर्थ निकलते हैं! उदाहरण के लिए यदि हम हिंदी के एक शब्द “सूत्र” को ही ले लें तो सूत्र मतलब डोरी/ धागा गणितीय सूत्र कोई भाष्य अथवा लेखन भी हो सकता है जैसे कि नासदीय सूत्रब्रह्म सूत्र इत्यादि! उसी प्रकार “अर्थ” शब्द का भावार्थ: सम्पति भी हो सकता है और मतलब भी! ठीक बिल्कुल उसी प्रकार शिवलिंग के सन्दर्भ में लिंग शब्द से अभिप्राय चिह्न, निशानी, गुण...

Most Powerful God Shiva

Lord Shiva is one of the most powerful God. He is Bholenath, an innocent compassionate God. And fierce Mahakal at the same time. He is not only considered as Adiyogi but he is also considered as the God of Gods. He is omnipotent, omniscient and omnipresent. In spite of him being considered as the destructor of life one has to understand that he is the reason for re-birth as well. He is the one who possesses both the generative and destructive powers of nature. Shiva is a very complex form who has control over both the macro and micro levels of the cosmic energy. Even in temples you will find a separate shrine for Shiva recognising him as the most powerful and fascinating deity of the Hindu trinity. Theres a story back to a point when Shri Vishnu and Brahma fought among themselves as to who was the most powerful between them. As the Gods predicted disastrous results out of such a controversy, they requested Shiva to intervene and find a solution. Shiva then took the form of a lingam ...

जानिए अपने आराध्य भगवान शिव शंकर के बारे में -

कौन है शिव  ? शि संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है, कल्याणकारी या शुभकारी। यजुर्वेद में शिव को शांतिदाता बताया गया है। शि का अर्थ है, पापों का नाश करने वाला, जबकि व का अर्थ देने वाला यानी दाता। क्या है शिवलिंग शिव की दो काया है? एक वह, जो स्थूल रूप से व्यक्त किया जाए, दूसरी वह, जो सूक्ष्म रूपी अव्यक्त लिंग के रूप में जानी जाती है। शिव की सबसे ज्यादा पूजा लिंग रूपी पत्थर के रूप में ही की जाती है। लिंग शब्द को लेकर बहुत भ्रम होता है। संस्कृत में लिंग का अर्थ है चिह्न। इसी अर्थ में यह शिवलिंग के लिए इस्तेमाल होता है। शिवलिंग का अर्थ है- शिव यानी परमपुरुष का प्रकृति के साथ समन्वित-चिह्न। शिव, शंकर, महादेव का अर्थ भी जानें शिव का नाम शंकर के साथ जोड़ा जाता है। लोग कहते हैं - शिव शंकर भोलेनाथ। इस तरह अनजाने ही कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम बताते हैं। असल में, दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है। शिव ने सृष्टि की स्थापना, पालन और विनाश के लिए क्रमश: ब्रह्मा, वि...