हनुमान जी की छलांग: समुद्र लाँघ लंका जलाई! रामायण लंका कांड की गुप्त लीला
लंका कांड की महिमा रामायण का लंका कांड केवल युद्ध का वर्णन नहीं, बल्कि भक्ति, साहस, त्याग और धर्म की विजय की अद्भुत गाथा है। इस प्रसंग में भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी का तेज, पराक्रम और विनम्रता पूरे चरम पर दिखाई देती है। *** हनुमान जी का समुद्र लांघना सीता माता की खोज जब किसी भी दिशा से सफल नहीं हुई, तब जामवंत जी ने हनुमान जी को उनका अपना बल याद दिलाया। स्मरण होते ही वे पर्वत समान विशाल रूप धारण कर “जय श्री राम” का नाद करते हुए एक ही छलांग में समुद्र पार करने निकल पड़े। रास्ते में पर्वत मैनाक, नाग कन्या सुरसा और समुद्र की लहरें भी उनकी परीक्षा लेती हैं, लेकिन हनुमान जी हर परीक्षा को सहजता, बुद्धि और विनम्रता से पार कर लेते हैं। *** लंका में प्रवेश और लंकिनी से भेंट समुद्र पार कर हनुमान जी त्रिकूट पर्वत के शिखर पर पहुंचे और वहाँ से स्वर्णमयी लंका का अद्भुत वैभव देखा। रात का समय चुनकर उन्होंने सूक्ष्म रूप धारण किया और नगर के द्वार पर पहुँचे, जहाँ लंका की रक्षक राक्षसी ‘लंकिनी’ ने उनका मार्ग रोका। हनुमान जी ने उसे हल्का-सा घूँसा मारा तो वह भू...