भगवान वामन अवतार की कथा: महाबली बलि और तीन पग पृथ्वी की अद्भुत लीला
हिन्दू धर्म के इतिहास में भगवान श्री Krishan/विष्णु के विभिन्न अवतारों का उद्देश्य एक ही रहा है—धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश। इन्हीं अवतारों में पाँचवाँ प्रमुख अवतार है वामन अवतार, जो देवताओं के कल्याण और ब्रह्मांडीय संतुलन को पुनर्स्थापित करने हेतु धरा पर प्रकट हुए। भगवान वामन का यह अवतार सिखाता है कि अहंकार कितना भी बड़ा हो, धर्म की विजय निश्चित होती है। 1. वामन अवतार की आवश्यकता क्यों पड़ी? एक समय ऐसा आया जब असुर-राजा महाबली बलि ने अपनी शक्ति, तप और दान के बल पर तीनों लोकों पर आधिपत्य जमा लिया। देवता स्वर्ग से वंचित हो गए और इंद्र सहित सभी अत्यंत दुखी हो गए। देवी अदिति ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि वे धर्म की रक्षा करें। इसी उद्देश्य से भगवान ने वामन रूप में अवतार लेने का निश्चय किया। --- 2. भगवान वामन का दिव्य जन्म भगवान विष्णु ने ऋषि कश्यप और देवी अदिति के यहां जन्म लेकर अवतार लिया। उन्होंने छोटे कद वाले ब्राह्मण बालक का रूप धारण किया— जो तेजस्वी, विनम्र और अत्यंत दिव्य दिखाई देते थे। यह बालक ही थे भगवान वामन, विष्णु का पाँचवाँ अवतार। --- 3. महाबली बलि का भव्य यज्ञ...