शक्ति पीठों की पवित्रता: जानिए 52 देवी स्थलों के रहस्य और महत्त्व

 शक्ति पीठ हिंदू धर्म में देवी माता सती के शरीर के अंगों के गिरने वाली पवित्र स्थल हैं, जहां भक्तों को सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। पुराणों जैसे तंत्रचूड़ामणि और दुर्गा सप्तशती में इनकी संख्या ५२ बताई गई है, हालांकि सामान्यतः ५१ ही प्रसिद्ध हैं। इनके दर्शन से जीवन में मां आदिशक्ति की कृपा प्राप्त होती है। प्रमुख शक्ति पीठों की सूचीनीचे ५२ शक्ति पीठों के नाम, स्थान और संबंधित अंगों की संक्षिप्त सूची दी गई है, जो विभिन्न पुराणों पर आधारित है।


1. हिंगलाज - कराची के निकट स्थित, माता का ब्रह्मरंध्र (सिर) गिरा था, यह शक्ति पीठ तपस्वियों और इच्छाओं की पूर्ति का प्रमुख केंद्र है।  

2. शर्कररे (करवीर) - यहाँ माता की आँख गिरी थी, आंखों के रोग निवारण के लिए प्रसिद्ध।  

3. सुगंधा-सुनंदा (बांग्लादेश) - नाक के रोगों के निवारण का पीठ।  

4. महामाया (अमरनाथ, कश्मीर) - कंठ गिरा, कंठ रोगों से मुक्ति का हेतु।  

5. ज्वालामुखी (हिमाचल प्रदेश) - जिह्वा गिरा, वाणी सिद्धि और ज्वाला स्वरूप।  

6. त्रिपुरमालिनी (जालंधर) - वाम स्तन गिरा, त्रिपुरासुर का नाश; सौभाग्यदायिनी।  

7. सावित्री (कुरुक्षेत्र, हरियाणा) - पैर गिरा, विद्या और ज्ञान की अधिष्ठात्री।  

8. मगधेश्वरी (पटना) - दाहिना कपोल, प्राचीन मगध साम्राज्य में स्थित, शत्रु निवारण।  

9. मनसा (कैलाश) - दायां हाथ, नाग पूजा का प्रसिद्ध स्थान।  

10. विरजा (उड़ीसा) - नाभि गिरा, संतान प्राप्ति का केंद्र।  

11. कामाक्षी (कांचीपुरम) - नाभि गिरा, वैवाहिक सुख की देवी।  

12. भ्रामरी (नासिक) - ठोड़ी, संगीत और कला की अधिष्ठात्री।  

13. अपर्णा (इंदौर) - गला, शिव भक्ति का प्रमुख स्थान।  

14. वैश्णवी (राजस्थान) - बायां पैर, धन-समृद्धि और विष्णु भक्तों का केंद्र।  

15. जगदीश्वरी (राजस्थान) - दायां भुज, जगत रक्षा करने वाली शक्ति।  

16. षोडशी (अमरकंटक) - दायां स्तन, नर्मदा नदी के उद्गम स्थल पर।  

17. त्रिपुरसुंदरी (त्रिपुरा) - दायां पैर, सौंदर्य और शक्ति की प्रतिमूर्ति।  

18. अंबाजी (अंबाजी, गुजरात) - हृदय, नवरात्रि का प्रसिद्ध तीर्थ।  

19. फुल्लरा (पश्चिम बंगाल) - निचला होंठ, वाणी शुद्धि हेतु।  

20. महिषमर्दिनी (पश्चिम बंगाल) - भौंह, राक्षसहंता देवी।  

21. कामाक्ष्या (असम) - योनि, तांत्रिक साधना केंद्र।  

22. जयंती (मेघालय) - विजय दायिनी।  

23. बिरजा (ओडिशा) - मोक्ष दायिनी।  

24. ललिता (प्रयागराज) - उंगलियां, ललिता सहस्रनाम का स्थल।  

25. विशालाक्षी (वाराणसी) - कान का कुंडल, दर्शन सिद्धि।  

26. गायत्री (पुष्कर) - कलाई, गायत्री मंत्र का स्थान।  

27. कात्यायनी (वृंदावन) - केश, कृष्ण लीला स्थल।  

28. नंदिनी (बिहार) - दायां नेत्र, नेत्र रोग निवारण।  

29. महालक्ष्मी (अबूगिरि) - कंठ, धन प्राप्ति।  

30. बहुला (हुगली) - सर्प दोष निवारण।  

31. कुमारी (कानपुर) - कुमारी स्वरूप की देवी।  

32. विमला (पश्चिम बंगाल) - पाप नाशिनी।  

33. कालरात्रि (सिलहट) - एड़ी, अंधकार नाशक।  

34. सुवर्णखली (पाटन) - दांत, स्वर्ण पूजा का स्थान।  

35. भवानी (बांग्लादेश) - बायां हाथ, शक्ति के रूप में।  

36. नंदीश्वरी (कानपुर) - नाभि, भक्ति का केंद्र।  

37. दाक्षायणी (तिब्बत) - कलाई, भगवती का रूप।  

38. लक्ष्मी (अजमेर) - धन तथा सफलता।  

39. शुक्ला शक्ति (उत्तर प्रदेश) - उज्जवलता की देवी।  

40. ब्रह्माणी (कर्नाटक) - आध्यात्मिक शक्ति।  

41. योगिनी (झारखंड) - तांत्रिक साधना।  

42. काली घाट (बंगाल) - शक्ति पूजन स्थल।  

43. अंबिका (गुजरात) - हृदय, भक्ति और शक्ति।  

44. नर्मदा (मध्य प्रदेश) - नदी के उद्गम स्थल।  

45. त्रिपुरसुंदरी (त्रिपुरा) - सौंदर्य देवी।  

46. महावीणा (तमिलनाडु) - निवास स्थान।  

47. रामगिरि (मध्य प्रदेश) - शक्ति स्थल।  

48. होरिका (उत्तराखंड) - शक्ति साधना।  

49. नयनाराधना (तमिलनाडु) - दर्शन केंद्र।  

50. तारा (तिब्बत) - ज्ञान की देवी।  

51. शिवानी (उत्तर प्रदेश) - पारिवारिक रक्षा।  

52. पार्वती (नेपाल) - हिमालय की देवी।  


।। जय मां आदिशक्ति ।। जय मां पार्वती ।।

Popular posts from this blog

त्रिदेव: ब्रह्मा, विष्णु और महेश की दिव्य त्रिमूर्ति का रहस्य एवं महत्व

भगवान शिव: अनंत तत्व और शाश्वत चेतना के देवता

“धर्म का अंतिम प्रहरी – भगवान श्री Krishan का सुदर्शन चक्र”