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शिव पूजा

शिव पूजा विधि श्री शिवमहापुराण में एक सूत्र इस प्रकार से है :- वेदी पर स्थापित प्रतिमा में, अग्नि में और ब्राह्मण के शरीर में षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। उक्त तीनो प्रकार में उत्तरोत्तर पूजन करना श्रेष्ठ है।(प्रमाण श्री शिवमहापुराण विद्येश्वर संहिता अध्याय १४ श्लोक२४) ब्राह्मण के षोडशोपचार पूजन में ये प्रक्रियाएं हैं। एक दिन पूर्व ब्राह्मण देवता को घर से सम्मानपूर्वक अपने घर लाना, उनके चरण धोकर चरणामृत पीना, उन्हें जल पान कराना, उनकी तेल-पंचामृत-पंचगव्य से अभिषेक करना, शरीर पोंछना, इत्र लगाना,भस्म त्रिपुण्ड़ लगाना , वस्त्र -उपवस्त्र पहनाना, पुष्प-माला पहनाना, धूप करना, पंच पकवान, ऋतु-फल खिलाना, दक्षिणा देना, आरती करना, चॅंवर डुलाना, चरण -सेवन करना और घर तक पहुॅचाने जाना। मैं इस प्रकार का नित्य ब्राह्मणों का पूजन करू- यह वरदान विष्णु के अवतार कृष्ण ने ब्राह्मण बालक उपमन्यु (ऋषि व्याघ्रपाद के पुत्र, द्यौम्य के बड़े भाई) से दीक्षा लेकर हिमालय पर १६ महीने तपस्या करके प्रभु शिव एवं पार्वती से आठ-आठ वरदानों में यह वरदान(ब्राह्मणों का नित्य पूजन) भी मॉंगा था।श्री गणेश जो कि प्रथम पूज्य है...