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शिव ही संसार में जीव चेतना का संचार है।

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शिव महापुराण के अनुसार स्वयं भगवान शिव ही हैं जिन्‍होंने ब्रह्मा को वेद का ज्ञान दिया, शिव को ही संसार में जीव चेतना का संचार कहा गया है। शिव का अर्थ ही कल्याण है, वही शंकर हैं, और वही रुद्र भी हैं। शंकर में शं का अर्थ कल्याण है और कर का अर्थ करने वाला। रुद्र में रु का अर्थ दुःख और द्र का अर्थ हरना- हटाना। इस प्रकार रुद्र का अर्थ हुआ, दुःख को दूर करने वाले अथवा कल्याण करने वाले। भगवान शिव आदी अनन्त है। भगवान शिव देवो के देव महादेव के रूप में माने जाते हैं। वह अनादि परमेश्वर हैं और आगम-निगम आदि शास्त्रों के अधिष्ठाता भी हैं। शिव को ही संसार में जीव चेतना का संचार कहा गया है। इस तरह भगवान शिव और शक्ति स्‍वरूपा मां पार्वती ही इस जगत और ब्रह्मांड में अपनी विशेष भूमिका का निर्वहन करते हैं। शिव महापुराण के अनुसार स्वयं भगवान शिव ही हैं जिन्‍होंने ब्रह्मा को वेद का ज्ञान दिया। ऐसी ही कई बातें शिव पुराण में वर्णित है आइए जानते हैं भगवान शिव से जुड़ी कुछ और बातें। 1 . मान्यता के अनुसार, ‘कोटि रुद्र संहिता’ और ‘शत रुद्र संहिता’ में भगवान शिव के तेज का पुंज जागृत हुआ जिससे विष्णु की उत्पत्ति ...

शिवरात्रि पर घर में कैसे करे शिव पूजा

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11 मार्च सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक शिव योग रहेगा।  उसके बाद सिद्ध योग लग जायेगा। जोकि 12 मार्च सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। शिव योग में किए गए सभी मंत्र शुभफलदायक होते हैं | इसके साथ ही रात 9 बजकर 45 मिनट तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा    महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त   महाशिवरात्रि तिथि-  11 मार्च 2021   महानिशीथ काल -  11 मर्च रात 11 बजकर 44 मिनट से रात 12 बजकर 33 मिनट तक   निशीथ काल पूजा मुहूर्त :   11 मार्च देर रात 12 बजकर 06 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक अवधि-48 मिनट महाशिवरात्रि पारण मुहूर्त  :  12 मार्च सुबह 6 बजकर 36 मिनट 6 सेकंड से दोपहर 3 बजकर 4 मिनट 32 सेकंड तक। चतुर्दशी  तिथि शुरू: 1 1 मार्च को दोपहर 2 बजकर 39 मिनट से चतुर्दशी तिथि समाप्त:  12 मार्च दोपहर 3 बजकर 3  मिनट   महाशिवरात्रि के दिन सुबह उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर शिवालय में शिवलिंग का जल अथवा पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। पंचामृत में आप दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और गंगाजल का इस्तेमाल करें। इसके बाद सफेद चंदन का तिलक लगाएं। तत्पश्चात ...