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Showing posts from December, 2025

भगवान वामन अवतार की कथा: महाबली बलि और तीन पग पृथ्वी की अद्भुत लीला

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हिन्दू धर्म के इतिहास में भगवान श्री Krishan/विष्णु के विभिन्न अवतारों का उद्देश्य एक ही रहा है—धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश। इन्हीं अवतारों में पाँचवाँ प्रमुख अवतार है वामन अवतार, जो देवताओं के कल्याण और ब्रह्मांडीय संतुलन को पुनर्स्थापित करने हेतु धरा पर प्रकट हुए। भगवान वामन का यह अवतार सिखाता है कि अहंकार कितना भी बड़ा हो, धर्म की विजय निश्चित होती है। 1. वामन अवतार की आवश्यकता क्यों पड़ी? एक समय ऐसा आया जब असुर-राजा महाबली बलि ने अपनी शक्ति, तप और दान के बल पर तीनों लोकों पर आधिपत्य जमा लिया। देवता स्वर्ग से वंचित हो गए और इंद्र सहित सभी अत्यंत दुखी हो गए। देवी अदिति ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि वे धर्म की रक्षा करें। इसी उद्देश्य से भगवान ने वामन रूप में अवतार लेने का निश्चय किया। --- 2. भगवान वामन का दिव्य जन्म भगवान विष्णु ने ऋषि कश्यप और देवी अदिति के यहां जन्म लेकर अवतार लिया। उन्होंने छोटे कद वाले ब्राह्मण बालक का रूप धारण किया— जो तेजस्वी, विनम्र और अत्यंत दिव्य दिखाई देते थे। यह बालक ही थे भगवान वामन, विष्णु का पाँचवाँ अवतार। --- 3. महाबली बलि का भव्य यज्ञ...

“धर्म का अंतिम प्रहरी – भगवान श्री Krishan का सुदर्शन चक्र”

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नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏🏻  सनातन धर्म में सुदर्शन चक्र शक्ति, धर्म और दिव्य शासन का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है। यह केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि परम चेतना का चक्र है, जिसे स्वयं भगवान श्री Krishan धारण करते हैं। यह चक्र अधर्म का विनाश और धर्म की रक्षा का अटल संकल्प है। सुदर्शन चक्र क्या है? सुदर्शन चक्र एक दिव्य, विद्युत-वेग वाला, चक्राकार अस्त्र है। इसके दो मुख्य अर्थ माने जाते हैं: “सु” + “दर्शन” = सुंदर, पवित्र दर्शन दिव्य प्रकाश का चक्र, जो संसार में व्यवस्था, सुरक्षा और धर्म का संतुलन बनाए रखता है। यह 108 तीखे धारों वाला तेजस्वी चक्र है, जिसकी गति प्रकाश से भी अधिक मानी गई है। इसे ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली अस्त्र कहा गया है। --- सुदर्शन चक्र का उद्गम पुराणों के अनुसार विष्णु भगवान ने सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था: देवों और असुरों के समुद्र मंथन के समय भगवान शिव के तप से अलग-अलग ग्रंथों में कथाएं भिन्न हैं, पर हर कथा यह सिद्ध करती है कि यह अस्त्र केवल परम पुरुषोत्तम भगवान विष्णु के योग्य है। --- भगवान Krishan और सुदर्शन चक्र जब भगवान श्री Krishan ने पृथ्वी पर अवतार लिया, तब स...

त्रिदेव: ब्रह्मा, विष्णु और महेश की दिव्य त्रिमूर्ति का रहस्य एवं महत्व

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हिन्दू धर्म के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश — इन तीन देवों की त्रिमूर्ति को त्रिदेव कहा जाता है। त्रिदेव एक ही अवतार में सृष्टि के निर्माण, पालन और संहार की प्रक्रियाओं का संचालन करते हैं। ब्रह्मांड में होने वाली हर घटना इन तीन शक्तियों के सामूहिक रूप से संचालित होने का परिणाम है। त्रिमूर्ति या त्रिदेव में तीन सर्वोच्च देव — ब्रह्मा, विष्णु और शिव/महेश्वर — शामिल हैं। त्रिदेव मिलकर ब्रह्मांड की रचना, उसके पोषण और उसके विनाश–पुनर्सृजन के कार्यों को संचालित करते हैं। ब्रह्मा: सृष्टि के निर्माता—इन्होंने देवताओं, दानवों, मनुष्यों, स्त्री-पुरुषों सहित समस्त जगत का निर्माण किया। विष्णु: जगत के पालनकर्ता—जो विश्व की व्यवस्था, स्थिरता और संरक्षण करते हैं। शिव/महेश: संहार एवं पुनर्जन्म के देव—जो संसार के अंत और पुनर्सृजन की प्रक्रिया का संचालन करते हैं। कथाओं के अनुसार त्रिदेव, दत्तात्रेय के अद्वितीय पुत्र माने गए हैं। बाद में यह कथन भी मिलता है कि ये ऋषि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र रूप में प्रकट हुए थे। त्रिमूर्ति के इस दिव्य प्रकट रूप में तीनों देवताओं के विशिष्ट प्रतीक सम्मिलित थे— ब्रह...