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Showing posts from January, 2021

Education System in ancient Bharat

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Like the culture and traditions of India , the system of education also has a rich history of its own. Majorly influenced by the Hindu religion, the knowledge acquired by people of ancient times was passed on from one generation to another and is reflected even in the teachings of today. Here’s a brief take on what the system of education was like during the early days of the Indian civilization.In the olden days, there was no formal education in India. A father passed on knowledge, primarily related to his occupation, to his child. Much later, two systems of education emerged – Vedic and Buddhist. The Vedic system revolved around the Vedas,  Vedangas  and  Upanishads,  while the Buddhist system preached the thoughts of the major Buddhist schools. The language of education was Sanskrit for the Vedic system and Pali for the Buddhist system. PC Google What was unique about ancient Indian education ? Education in ancient India was quite different...

महाभारत की 25 महत्वपूर्ण शिक्षा जो जीवन बदल सकती है

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महाभारत की शिक्षा हर काल में प्रासंगिक रही है।  महाभारत  को पढ़ने के बाद इससे हमें जो शिक्षा या सबक मिलता है, उसे याद रखना भी जरूरी है। तो आओ हम जानते हैं ऐसी ही 25 तरह की शिक्षाएं, जो हमें महाभारत, युगंधर और मृत्युंजन पढ़ने पर मिलती हैं। हालांकि यह भी सच है कि आप महाभारत पढ़ेंगे तो हो सकता है कि आपको कुछ अलग शिक्षा या सबक मिले। 1.जीवन हो योजनाओं से भरा :  जीवन के किसी भी क्षेत्र में बेहतर रणनीति आपके जीवन को सफल बना सकती है और यदि कोई योजना या रणनीति नहीं है तो समझो जीवन एक अराजक भविष्य में चला जाएगा जिसके सफल होने की कोई गारंटी नहीं। भगवान  श्रीकृष्ण  के पास पांडवों को बचाने का कोई मास्टर प्लान नहीं होता तो पांडवों की कोई औकात नहीं थी कि वे कौरवों से किसी भी मामले में जीत जाते। 2.संगत और पंगत हो अच्‍छी :  कहते हैं कि जैसी संगत वैसी पंगत और जैसी पंगत वैसा जीवन। आप लाख अच्छे हैं लेकिन यदि आपकी संगत बुरी है, तो आप बर्बाद हो जाएंगे। लेकिन यदि आप लाख बुरे हैं और आपकी संगत अच्छे लोगों से है और आप उनकी सुनते भी हैं, तो निश्‍चित ही आप आबाद हो ...

भगवान विष्णु का अंतिम अवतार - कल्कि अवतार

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कल्कि अवतार का वर्णन युधिष्ठिर द्वारा मार्कण्डेय से पूछने पर मार्कण्डेय युगान्तकालिक कलियुग समय के बर्ताव के बारे में युधिष्ठिर को बताते हैं और अब कल्कि अवतार का वर्णन के बारे में बताया गया है, जिसका उल्लेख महाभारत वनपर्व के 'मार्कण्डेयसमस्या पर्व' के अंतर्गत अध्याय 190 में बताया गया है। मार्कण्डेय का संवाद मार्कण्डेय कहते हैं- युधिष्ठिर युगान्तकाल आने पर सब ओर आग भी जल उठेगी। उस समय पथियों को मांगने पर कहीं अन्न, जल या ठहरने के लिये स्थान नहीं मिलेगा। वे सब ओर से कोरा जवाब पाकर निराश हो सड़कों पर ही सो रहेंगे। युगान्तकाल उपस्थित होने पर बिजली की कड़क के समान कड़वी बोली बोलने वाले कौवे, हाथी, शकुन, पशु और पक्षी आदि बड़ी कठोर वाणी बोलेंगे। उस समय के मनुष्य अपने मित्रों, सम्बन्धियों, सेवकों तथा कुटुम्बीजनों की भी अकारण त्याग देंगे। प्रायः लोग स्वदेश छोड़कर दूसरे देशों, दिशाओं, नगरों और गांवों का आश्रय लेंगे और हा तात! हा पुत्र! इत्यादि रूप से अत्यन्त दुःखद वाणी में एक-दूसरे को पुकारते हुए इस पृथ्वी पर विचरेंगे। युगान्तकाल में संसारकी यही दशा होगी...

भगवान शिव और तांडव नृत्य

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तांडव नृत्य अर्थात सृष्टि के संहार का नृत्य ऐसा नृत्य जो सृष्टि की लयात्मक व्यवस्था को अव्यवस्थित कर उसे प्रलय में बदल देता है। तांडव नृत्य अक्सर भगवान शिव से ही जोड़ा जाता रहा है, कहा जाता है कि जब सृष्टि के संहार की बारी आती है तो शिव जाग्रत हो उठते हैं और वो महाकाली के साथ विध्वंस का ऐसा नृत्य करते हैं जिससे सृष्टि का संहार हो जाता है। परंतु क्या तांडव नृत्य सिर्फ सृष्टि के संहार से ही जुड़ा है या इसका कोई और भी अर्थ है। तांडव का अर्थ क्या है तांडव शब्द तंदुल शब्द से बना है जिसका अर्थ है उछलना। संपूर्ण उर्जा के साथ शरीर को उछालने की क्रिया को तांडव कहते हैं । इस नृत्य में वीर और वीभत्स रस का प्रयोग किया जाता है । आम तौर पर सृष्टि में दो प्रकार की स्थिति होती है । लयात्मक स्थिति और प्रलयात्मक स्थिति। परम पुरुष और उसकी प्रकृति हमारी सृष्टि प्रकृति और पुरुष से मिल कर बनी है। पुरुष को कई ईश्वरीय सत्ताओं से जोड़ा जाता रहा है। भगवान सदाशिव ही परम पुरुष हैं और माता पार्वती उनकी प्रकृति हैं जिनके साथ मिलकर भगवान शिव सृष्टि की रचना , पालन और संहार करते हैं। Picture Credit The_L...

5 intriguing questions of life

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The lore of Lord Ram and Ravan is as old as time. We know about its major lessons and present them in the most simplistic way for common understanding. The virtue of Sita, the valour of Ram, the deceit of Ravan and the end of it all – light wins over darkness, goodness over evil. But each page of the fascinating tale as encapsulated in the several versions of Ramayana is engaging and an enriching insight into various facets of life. The epic brings godliness closer to human experience and allows for a person to feel that he too can live a righteous life in a modern context. What really endures are underlying truths of existence which are as relevant now as they were then. As per Ram Charit Manas, it so happened that once during their exile into the forests, Sita was away to pick some flowers and berries. Finding Lord Ram alone and relaxed, Lakshman, his devoted younger brother, approaches him with humility and curiosity. Knowing him to be divinity in human form,...

वास्तव में सनातन धर्म में कितने देवी देवता हैं?

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अक्सर हिन्दू धर्म पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि यह बहुदेववादी धर्म है, लेकिन यह सरासर गलत है। हिन्दू धर्म में सर्वोच्च शक्ति 'ब्रह्म' (भगवान ब्रह्मा नही) को माना गया है। प्राचीनकाल में 3 महत्वपूर्ण देव थे जिन्हें 'त्रिदेव' कहा गया। ये 3 देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं। हिन्दू धर्म के इस सत्य या दर्शन को सभी धर्मों ने सहर्ष स्वीकार किया। भाषा और स्थान के अनुसार इनकी प्राचीनकालीन संस्कृति और सभ्यता में भिन्न-भिन्न नाम थे लेकिन इनकी कहानियां और इनके कार्य एक जैसे बताए गए हैं। हिन्दू धर्म में त्रिदेव :  शिवपुराण के अनुसार उक्त त्रिदेव के जनक हैं सदाशिव और दुर्गा। सदाशिव और दुर्गा के जनक हैं परब्रह्म परमेश्वर। उक्त त्रिदेव की पत्नियां हैं- सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती।  1. ब्रह्मा :  ब्रह्मा को मनुष्य, पशु-पक्षी आदि जीव जगत की सृष्टि करने वाला माना गया है। वे सभी के पिता हैं। उनके 10 पुत्रों से ही मानव सृष्टि का विकास हुआ। माता सरस्वती भगवान ब्रह्मा की पत्नी है।   2. विष्णु  : ब्रह्मा के काल में हुए भगवान विष्णु को पालनहार माना जाता है। भगवान विष्णु  का मा...