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चीन के चायनीज चाल में फंस गई दुनिया?

चायनीज वायरस की चाल में फंस गई दुनिया? वुहान वायरस, चायनीज वायरस, कोरोना या COVID-19 वायरस की चाल में क्या आज दुनिया फंस गई है। सुपर पावर अमेरिका ने भी क्यो इस चायनीज वायरस के आगे घुटने टेक दिए हैं?? दुनिया मे आज स्पेन, इटली, ईरान, अमेरिका, साउथ कोरिया, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, जर्मनी, भारत, इजरायल, दुनिया के नक्शे पर ये वो देश है जो आज सम्पूर्ण दुनिया की दशा और दिशा तय करते हैं। ये देश प्रभावशाली देशों की सूची में अग्रणी है। दुनिया के राजनीतिक केंद्र है, आज दुनिया की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को चला रहे हैं। लेकिन आज चायनीज वायरस के कारण बंद पड़े हैं। यूरोप में स्पेन, इटली, जर्मनी, ग्रेट ब्रिटेन का दबदबा है तो अटलांटिक क्षेत्र में अमेरिका और कनाडा के दबदबा है। मिडिल ईस्ट में इजरायल व ईरान का दबदबा कायम है तो वही एशिया देशों में भारत व जापान की तूती बोलती है। बारीकी से नजर डाले तो रूस और उत्तर कोरिया में चायनीज वायरस का असर बहुत ही कम है। चीन में तो वुहान वायरस ने भयंकर तबाही मचाई थी, यही से यह जानलेवा चायनीज वायरस निकला था। चायना के अनुसार करीब 3300 लोग इस चायनीज वायरस के क...

Shivratri 2020: पुराणों में महाशिवरात्रि

Shivratri 2020: पुराणों में महाशिवरात्रि।  (Maha Shivratri) का सर्वाधिक महत्‍व बताया गया है. हिन्‍दू मान्‍यताओं में साल में आने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। महाशिवरात्रि (Mahashivratri) सनातन धर्म का प्रमुख त्‍योहार है। आदि देव महादेव के भक्‍त साल भर इस दिन की प्रतीक्षा करते हैं। मान्‍यता है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, बेर और भांग चढ़ाने से भक्‍त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे महादेव की विशेष कृपा मिलती है।  वैसे तो हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि (Shivratri) आती है, लेकिन फाल्‍गुन मास की कृष्‍ण चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है।  पुराणों में महाशिवरात्रि का सर्वाधिक महत्‍व बताया गया है।  सनातन मान्‍यताओं में साल में आने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। आपको बता दें कि इस बार 21 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जा रही है। महाशिवरात्रि की तिथि और शुभ मुहूर्त  महाशिवरात्रि की तिथि: 21...

SHIVA – THE GOD OF DESTRUCTION

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He who is without beginning and without end, in the midst of confusion, the Creator of all, of manifold form, the One embracer of the universe… by knowing Him, one is released from all fetters. SHIVA – THE GOD OF DESTRUCTION Shiva literally means “auspiciousness, welfare”. He is the third god of the Hindu Triad and he is the god of destruction. He represents darkness , and it is said to be the “angry god”. The term destruction as it relates to Shiva’s cosmic duties can be deceiving. Often Lord Shiva destroys negative presences such as evil, ignorance, and death. Also, it is the destruction created by Lord Shiva that allows for positive recreation. For example, an artisan may melt down (i.e., destroy) old pieces of metal during his process of creating a beautiful piece of art. Picture Credit ( Instagram/ramesh studio ) It is for this reason that Shiva holds a complementary role to Brahma, the god of creation. Shiva protects souls until they are...

The chhatrapati shivaji maharaj

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छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फ़रवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था. इनके पिता का नाम शाहजी भोसलें और माता का नाम जीजाबाई था. शिवनेरी दुर्ग पुणे के पास हैं, शिवाजी का ज्यादा जीवन अपने माता जीजाबाई के साथ बीता था. शिवाजी महाराज बचपन से ही काफी तेज और चालाक थे. शिवाजी ने बचपन से ही युद्ध कला और राजनीति की शिक्षा प्राप्त कर ली थी. Picture Credit instagram/graphics_designer.suhas भोसलें एक मराठी क्षत्रिय हिन्दू राजपूत की एक जाति हैं. शिवाजी के पिता भी काफी तेज और शूरवीर थे. शिवाजी महाराज के लालन-पालन और शिक्षा में उनके माता और पिता का बहुत ही ज्यादा प्रभाव रहा हैं. उनके माता और पिता शिवाजी को बचपन से ही युद्ध की कहानियां तथा उस युग की घटनाओं को बताती थीं. खासकर उनकी माँ उन्हें रामायण और महाभारत की प्रमुख कहानियाँ सुनाती थी जिन्हें सुनकर शिवाजी के ऊपर बहुत ही गहरा असर पड़ा था. शिवाजी महाराज की शादी सन 14 मई 1640 में सईबाई निम्बलाकर के साथ हुई थीं. शिवाजी महाराज का सैनिक वर्चस्व : सन 1640 और 1641 के समय बीजापुर महाराष्ट्र पर विदेशियों और राजाओं के आक्रमण हो रह...

Shakti: A Universal Mother

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माँ आदिशक्ति, सनातन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवी में से एक है। वास्तव  में एक दिव्य ब्रह्मांडीय ऊर्जा है जो स्त्री ऊर्जा और ब्रह्मांड के माध्यम से गतिशील बलों का प्रतिनिधित्व करती है। शक्ति, सनातन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवी में से एक है, वास्तव में एक दिव्य ब्रह्मांडीय ऊर्जा है जो स्त्री ऊर्जा और ब्रह्मांड के माध्यम से गतिशील बलों का प्रतिनिधित्व करती है। शक्ति, जो निर्माण के लिए जिम्मेदार है और परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पहलू भी है, अक्सर राक्षसी शक्तियों को नष्ट करने और संतुलन बहाल करने के लिए देवी माँ प्रकट होती है। एक महत्वपूर्ण ब्रह्मांडीय शक्ति के रूप में, शक्ति कई रूपों और नामों से जानी जाती है, जिसमें देवी मां, भयंकर योद्धा और विनाश की देवी काली के रूप में शामिल हैं। हिंदू धर्म में, हर देवता में एक शक्ति, या ऊर्जा शक्ति होती है। यह एक कारण है कि वह पूरे भारत में लाखों लोगों द्वारा पूजी जाती है। शक्ति को पार्वती, दुर्गा, और काली के रूप में भी जाना जाता है, देवी माँ सर्वशक्तिमान हैं जिन्हें आप ताकत, उर्वरता और शक्ति के लिए कह सकते हैं। आप उसे एक शक्तिशाली महिला आकृति क...

Veerbhadra – A Fearful Avatar Of Lord Shiva

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वीरभद्र अवतार भगवान शिव हिंदू धर्म के मुख्य देवताओं में से एक हैं, विष्णु और ब्रह्मा के साथ त्रिमूर्ति देवताओं में से एक हैं। उनकी पूजा  हिंदुओं द्वारा की जाती है जो उन्हें बहुत सम्मान देते हैं और उनका आशीर्वाद लेने के लिए उत्सुक रहते हैं। इतिहास के दौरान भगवान शिव कई बार प्रकट हुए थे और भारतीय पौराणिक कथाओं के माध्यम से इन सभी का पर्याप्त संदर्भ है। भगवान शिव के सबसे प्रतिष्ठित अवतारों में से एक उनका वीरभद्र अवतार है, जिनके साथ एक महान कथा है - वीरभद्र भगवान शिव के क्रोध से उत्पन्न एक शक्तिशाली शिव अवतार था। यह प्रकटन दिखने में काफी डरावना था और जीवन से बड़ा था ओर सभी देवताओं से भी अधिक शक्तिशाली था। दक्ष प्रजापति भगवान ब्रह्मा का एक पुत्र था और दक्षिणायन या सती सहित कई पुत्रियों का पिता था। माता सती की भगवान शिव से शादी करने की इच्छा थी लेकिन दक्ष ने इस बात पर आपत्ति जताई क्यो की प्रजापति दक्ष भगवान शिव में किसी प्रकार की कोई आस्था विश्वास नही रखता था। प्रजापति दक्ष भगवान शिव का अन्य देवताओं की तरह सम्मान नहीं किया करता था। माता सती ने हट कर के भगवान शिव से...

भगवान शिव के सिद्धांत व परिभाषा

एक अच्छे भक्त की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह जिस देवता की पूजा करना चाहता है, उसके बारे में निरंतर आध्यात्मिक जिज्ञासा होती है। संबंधित जानकारी भक्त को धीरे-धीरे देवता में विश्वास बढ़ाने में मदद करेगी, और आध्यात्मिक अभ्यास को तेज करेगी। अक्सर, भक्त सूचना के गलत स्रोतों, जैसे टीवी श्रृंखला, फिल्मों या यहां तक ​​कि देवी-देवताओं पर लिखे गए उपन्यासों पर भी भरोसा करते हैं। निम्नलिखित लेख से भगवान शिव के भक्तों को भगवान शिव के सिद्धांत, उनकी शारीरिक विशेषताओं और उनके परिवार के अर्थ के बारे में सही और आधिकारिक जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी। हम प्रार्थना करते हैं कि यह ज्ञान भक्तों को प्रभावी आध्यात्मिक अभ्यास के लिए एक मजबूत आधार बनाने में सहायता करता है, ताकि वे भगवान शिव की दिव्य कृपा प्राप्त कर सकें। भगवान शिव के सिद्धांत की उत्पत्ति और परिभाषा 1. शिव शब्द (शिव) शब्द 'वश' (वश) के अक्षरों को उलट कर बनाया गया है। वश का अर्थ है आत्मज्ञान करना; इसलिए, जो आत्मज्ञान करता है वह शिव है। शिव पूर्ण हैं, आत्म-उज्ज्वल हैं। वह प्रकाशमय रहता है और ब्रह्मांड को प्रकाशित करता है। 2. ...